आरटीआई की ताकत से डरे पंचायत सचिव, कागज़ों में विकास, ज़मीन पर सन्नाटा – छतौना पंचायत में भ्रष्टाचार की बू और जवाबदेही से भागता तंत्र..?

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर (कोटा) : जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत छतौना में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पंचायत में चल रहे विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन को लेकर ग्रामीणों के बीच नाराज़गी बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि का मनमाना उपयोग किया जा रहा है, और जब इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो पंचायत प्रशासन ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) की खुलेआम अवहेलना की। ग्राम पंचायत छतौना की जनसूचना अधिकारी कुसुम किरण द्वारा आरटीआई आवेदन पर समयसीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। आवेदक द्वारा पंचायत में हुए खर्चों, कार्यों की स्थिति, और भुगतान विवरण की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अधिकारियों की ओर से न तो कोई जवाब मिला और न ही कोई दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। इस कारण ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में भ्रष्टाचार की पोल न खुल जाए, इस भय से जनसूचना अधिकारी जानबूझकर जानकारी देने से बच रही हैं। वहीं पंचायत सचिव और सरपंच पर यह भी आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की राशि कागजों में खर्च दिखा दी गई, जबकि ज़मीनी स्तर पर काम अधूरे हैं। कुछ स्थानों पर तो कार्य आरंभ ही नहीं किए गए, लेकिन भुगतान पूरा कर दिया गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पंचायत की मनमानी के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है। पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। कई बार शिकायतें करने के बाद भी विभागीय अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत कोटा के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और छतौना पंचायत के 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग की जांच कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि आरटीआई की जानकारी न देने वाले जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।





